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प्रमुख सचिव के निर्देश के बाद भी नहीं शुरू हुआ कार्यों का भौतिक सत्यापन 15 साल में बनी संरचनाओं का होना था सत्यापन, अधिकारियों ने नही दिखाई रुचि सत्यापन होने पर असलियत आयेगी सामने

प्रमुख सचिव के निर्देश के बाद भी नहीं शुरू हुआ कार्यों का भौतिक सत्यापन
15 साल में बनी संरचनाओं का होना था सत्यापन, अधिक
मध्यप्रदेश शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा ने 22 अक्टूबर 2020 को पत्र जारी कर सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायतों को निर्देशित किया था कि कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से बनी अधोसंरचनाओं का भौतिक सत्यापन 1 माह में किया जाय। साथ ही प्रमुख सचिव ने पत्र में यह भी लिखा था कि इस कार्र्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। लेकिन आज दिनांक तक सत्यापन के कार्यो को जरूरी नही समझा गया। सरकार की स्पष्ट मंशा थी कि सर्वे के बाद जिले के निर्माण कार्यो की हकीकत सामने आ जायेगी। जिसके कारण अधिकारियों ने सत्यापन कार्य करने की कोई जरूरत नही समझी गई। अगर अधिकारियों द्वारा 15 साल के अधोसंरचनाओं का भौतिक सत्यापन करा दिया जाये तो निर्माण कार्यो की सारी हकीकत बाहर निकल आयेगी और अधिकारियों-कर्मचारियों की गर्दन फंस जायेगी। जिसकी वजह से दो माह से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी कार्यो के सत्यापन की कोई जरूरत नही समझी गई है। सत्यापन के बाद जो परिसम्पत्तियां टूट-फूट हो या मरम्मत योग्य हो तो ऐसी संरचनाओं को उस मद की राशि से नियमानुसार मरम्मत कराया जा सके।
इन्हे मिली थी सत्यापन की जिम्मेदारी: इस सत्यापन कार्य के लिए जनपद पंचायत मुख्यकार्यपालन अधिकारियों से समन्वय कर सत्यापन कराते हुए निर्धारित जानकारी शासन को देने के लिए कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को नोडल अधिकारी भी बनाया गया। लेकिन दो माह बीत जाने पर भी कोई सत्यापन का कार्य नही कराया गया और न ही शासन को जानकारी भेजी गई।
1742 कार्य हो गए लापता
जिले में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि मनरेगा द्वारा कराये गए कार्य ही मौके से अब गायब हो गए है। संबंधित अधिकारी कामों को खोज रहे है लेकिन मिल नही पा रहे है। एक दो कार्य गायब हुए होते तो चल जाता यहां पूरे 1742 कार्य मौके से गायब है। जिन कार्यो की जियो टै्िरगंग न होने के कारण उनकी सीसी नही जारी हो पा रही है। सत्यापन के बाद बहुत से मामले सामने आयेगें।
अधिकारी फेर रहे पानी
जिले में प्रशासन बेपटरी है बेलगाम अधिकारी कर्मचारी मनमानी पर उतर रहे हैं तो इसकी मूल जिम्मेदारी जिला पंचायत और जिला प्रशासन की है जो सब कुछ जानकर भी मुँह फेरे बैठा है। इस सत्यापन से जहां सभी संरचनाओं की स्थिति का पता चलता वही सुधार के कार्य भी हो सकते थे। एक तरह से भौतिक ऑडिट की मंशा शासन को मंशा पर जिला और जनपद पंचायत पानी फेरते दिख रहे।
वर्ष 2004-05 से अब तक
महात्मा गांधी नरेगा,13वां,14वां,15वां वित्त आयोग,मध्यान्ह भोजन अंतर्गत किचन शेड, मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, वाटरशेड, आजीविका मिशन के अधोसंरचना के साथ पंचायतराज के अन्य अभी कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाना था जो विगत 15 साल में निर्मित हुए हों,उन कार्य की वर्तमान भौतिक स्थिति से अवगत कराना था,जिन संरचनाओं में सुधार मरम्मत की आवश्यकता हो उनको उसी योजना के मद से सुधार भी किया जाना था।
अभी फिलहाल कोई कार्रवाई नही हो पाई है अभी इसमें समय लगेगा। 15 सालों के कार्यो को छंटवाया जायेगा। इसमें दो प्वाईंट पर फोकस रहेगा। जितनी भी सम्पत्तियां है वो राजस्व रिकार्ड में इंट्री हो जायें। शुरूआत कर दिया गया है जल्द ही इस कार्य को पूरा कर लिया जायेगा।
हिमांशु तिवारी,
कार्यपालन यंत्री
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा

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