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टिकरी के बाद अब रेत खदान निधपुरी में रेत माफ़िया की गुंडागर्दी आ रही सामने… जबरिया मशीनों से अवैध उत्खनन के साथ धूल से किसानों की फसल कर रहे चौपट…

सीधी.ENews madhya pradesh
जिले में जहाँ इस समय रेत माफिया का आतंक रुकने का नाम नही ले रहा है वहीं जिला से लेकर स्थानीय प्रशासन मूक वधिर सा वेंटिलेटर पर पड़ा हुआ है। पुरे जिले के विभिन्न घाटों से अवैध तरीके से मशीनों द्वारा उत्खनन व किसानों, आदिवासियों पर बंदूक की नोक पर जुल्मोशितम होता देख कर भी खनिज व राजश्व के आलाधिकारी आंखों पर पट्टी बांध लिए हैं।

हैरत की बात ये कि पूरे मामले पर बड़ी बड़ी नैतिकता को डींगें हांकने वाले भजपा व कांग्रेसी खद्दरधारी भी गत 3 महीने से मौन व्रत धारण किये हुए हैं, हालात आपातकाल जैसा हो चुका है।

ज्ञात हो कि गक्त दिनों टिकरी में आदिवासियों पर खदान के 3 दर्जन क़रीब गुंडों ने एक आदिवासी को सरेराह पीटा, हल्ला गोहार के बाद मौके पर जब परिजन छुड़ाने पहुचे तो उनके साथ भी मारपीट कर दी गयी। उसके बाद सूत्रों की माने तो जब आदिवासियों पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर कंपनी का पक्ष लेने लगी तो आक्रोशित आदिवासियों ने भी कुटाई कर दी।
बड़ा सवाल ये उठता है कि जब कानून के रक्षक ही बन गए हैं भक्षक तो आम जनता को कानून स्वयम हाँथ में लेना पड़ेगा या फिर रेत माफिया के हांथो अपना जमीर गिरवी कर चुका प्रशासन व खद्दरदारी खुद अपने संवैधानिक पदों से इस्तीफा देंगे!

हाल में ही गोतरा, पौड़ी, टिकरी के बाद अब निधपुरी में भी रेत माफिया ने गोपद नदी का सीना छलनी कर मशीनों से बिना अनुमति अवैध उत्खनन कर जीवनदायिनी नदी का चीरहरण करने पर तुल गया है। 2 पुकेलन मशीन लगाकर दिन रात भारी वाहनों में नदी के अंदर से रेत उत्खनन कर रहा है। मुख्य सड़क से 5 किलोमीटर अन्दर तक कच्ची सड़क से ट्रकों के चलने से उड़ रही धूल से किसानों को खड़ी फसल चौपट हो रही है।
इतना ही नही वैध खदान के आड़ में रेत माफिया द्वारा एन जी टी के निर्देशों को जमकर धज्जियां तो उड़ाई ही जा रही हैं वहीं गौड़ खनिज अधिनियम में स्थानीय कामगार, निवासियों व ग्राम पंचायतों को रॉयल्टी व लोडिंग के भुगतान पर रेत भी नही दिया जाता, बल्कि नियत रॉयल्टी से 4 गुना अवैध बसूली की जा रही है।

इस पूरे मामले पर न ही खनिज के अधिकारी कार्यवाही कर रहे हैं न ही कलेक्टर या स्थानीय एस डी एम तहशीलदार! बल्कि जो भी इन माफियाओं अथवा प्रशासन पर आवाज उठाता है उसे किसी न किसी तरह से डराया धमकाया जाता है जिससे उसकी आवाज बन्द हो सके।

अब देखना यह होगा को नैतिकता की बड़ी बड़ी बातें करने ऑयर माफियाओ को जमीन में दफना देने जैसे बयान देने वाले भाजापा मुख्यमंत्री के विधायक सांसद इस पर किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं और मशीनों से अवैध उत्खनन रोके जाकर स्थानीय मजदूरों को काम दिलाने में क्या भूमिका निभाते हैं!
वहीं कांग्रेस नेताओ की भी असल कलई इस मामले पर खुलने को है, क्या वह बाकई नदियों व मजदूरों के पक्ष में आवाज उठायेंगे या वही कहावत सच साबित होगी कि तू चोर मैं सिपाही….!

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