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जिपं बना भ्रष्टाचारियों का अड्डा सत्य प्रकाश तिवारी का कारनामा आया सामने फाइल पर 47 सड़कों की हुई स्वीकृति,पोर्टल पर 298 सड़क निर्माणाधीन

जिला पंचायत इस समय भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। यहां सभी नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है। जब बड़े अधिकारियों की गर्दन फंसने लगती है तब छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाकर मामले को शांत करा दिया जाता है। अभी विगत माह फर्जी दस्तखत से सड़कों की स्वीकृती का मामला प्रकाश में आया था। जहां एक कम्प्यूटर आपरेटर को बलि का बकरा बनाकर मामले को शांत करा दिया गया। ऐसा ही एक मामला महात्मा गाँधी नरेगा अंतर्गत सुदूर अप्रोच सड़क निर्माण की स्वीकृति से सम्बंधित सूचना के अधिकार के तहत दी गयी जानकारी में एक बड़े घोटाले का तथ्य सामने आया है। अधिवक्ता और आरटीआई कार्यकर्ता अम्बुज पांडेय ने बताया कि जिला पंचायत को 06 अगस्त 2019 से सुदूर अप्रोच सड़क की स्वीकृति जारी करने का अधिकार मिला तब कितनी सड़कों की स्वीकृति जारी की गई इसकी जानकारी मांगी गई जिसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने परियोजना अधिकारी मनरेगा सत्यप्रकाश तिवारी के हवाले से जो जानकारी दी उसमें केवल 47 सड़कों की स्वीकृति का पत्र दिया गया है जबकि नरेगा के ऑनलाइन पोर्टल 22 करोड़ 98 लाख की लागत वाली पर 298 सड़क निर्माणाधीन प्रदर्शित हो रही हैं जिनमें अब तक 8 करोड़ 98 लाख का व्यय भी किया जा चुका है। जिसमे 251 सड़कों का कोई ब्यौरा आरटीआई के तहत दी गयी जानकारी में नही दिया गया और न ही जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रतिवेदन जानकारी में दिया गया ऐसे में गुपचुप तरीके से जो 251 सड़के संचालित हैं इसमें एक बड़ा फर्जीवाड़ा है।
एक के बाद एक घोटाले आ रहे सामने: जब से सहायक यंत्री सर्व शिक्षा अभियान सत्यप्रकाश तिवारी की पदस्थापना जिला पंचायत में परियोजना अधिकारी के पद पर हुई है तब से नित नये मामले सामने आ रहे है। विगत माह फर्जी दस्तखत का मामला सामने आया था जिसके माध्यम से सैकड़ों कार्यो की स्वीकृती कर दी गई। अभी इस पूरे मामले का पटाक्षेप भी नही हो पाया था कि दूसरा घोटाला सामने आ गया। मजे की बात तो यह है कि बन रही सड़कों का कोई भी रिकार्ड जिला पंचायत में नही है।
98 प्रतिशत सड़के 14 लाख से ऊपर की
जिले में इस समय जितनी भी सड़कों का निर्माण चल रहा है उसमें 98 प्रतिशत सड़के 14 लाख से ऊपर की एक सड़क बन रही है। यहां सरपंच व सचिव द्वारा 15 लाख तक भुगतान करने का अधिकार प्राप्त है जिससे इसका फायदा उठाकर 14 लाख से ऊपर की सड़के बन रही है चाहे उन सड़कों की लंबाई 100 मीटर हो या 1 किमी सबमें 14 लाख से ज्यादा की स्वी$कृती मिली हुई है।
अब क्या होगी कार्रवाई
परियोजना अधिकारी सत्य प्रकाश तिवारी द्वारा अपने जांच प्रतिवेदन में 13 सड़कों के फर्जी आदेश जारी होने का उल्लेख कर कंप्यूटर ऑपरेटर पवन सिंह के विरुद्ध कार्यवाही करवाई गई थी। कम्प्यूटर ऑपरेटर ने अपने लिखित बयान में बार बार प्रभारी परियोजना अधिकारी को फर्जी आदेशों के लिए जिम्मेदार बताया गया था लेकिन उसके बयान का प्रतिपरीक्षण न तो कलेक्टर के द्वारा कराया गया न सीईओ जिला पंचायत के द्वारा और कम्प्यूटर ऑपरेटर को बलि का बकरा बना कर पूरे मामले को दबा दिया गया अब जब 251 सड़कों के निर्मित होने की जानकारी सामने आई है ऐसे में प्रभारी परियोजना अधिकारी के विरुद्ध क्या कार्यवाही होती है ये गौरतलब होगा।
कहां कितनी बन रही सड़कें
मनरेगा पोर्टल की यदि माने तो इस समय जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत 39,मझौली में 57,रामपुर नैकिन में 70,सीधी में 76 और सिहावल में 56 सड़क का निर्माण प्रदर्शित हो रहा है ऐसे में सूचना के अधिकार में दी गयी स्वीकृति की जानकारी के उलट अत्यधिक संख्या में बिना स्वीकृति के सड़कों का निर्माण होना शासन के दिशा-निर्देशों के विपरीत एक बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
बड़े पैमाने पर चल रहा सिण्डीकेट
जिला पंचायत में इस समय भारी मात्रा में सिण्डीकेट चल रहा है। यहां जो प्रस्ताव जनपदों के माध्यमों से आने चाहिए लेकिन वो अब जिला पंचायत से सीधे काम हो जाता है। जिसकी वजह से अब जनपदों की भूमिका को समाप्त कर दिया गया है। सारे फैसले अब जिला पंचायत से ही लिए जा रहे है। जिससे अब मनमानी तौर पर कमीशन लेकर कार्यो की स्वीकृती व निरस्तगी की जा रही है।
अभी सड़कों के बारे में कन्फर्म जानकारी नही है लगभग 100 सड़कों की स्वीकृती इस समय मिली हुई है।
सत्यप्रकाश तिवारी,प्रभारी परियोजना अधिकारी मनरेगा

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